प्रेरणादायक कहानियां – परमात्मा पर भरोसा

एक राजा था उसका एक मंत्री था , जिसका नाम जय सिंह था। वह बहुत बुद्धिमान तथा समझदार था।एक बार राजा के राज्य पर साथ वाले राज्य ने आक्रमण कर दिया। वह बहुत दुखी हुआ। वह अपनी जान बचाने के लिए गुप्त मार्ग से अपने मंत्री के साथ जंगल में पहुंच गया । उसके मंत्री को चाहे कोई दुख हो या सुख हो वह हमेशा यही कहता कि *परमात्मा जो करता है अच्छा ही करता है।* परंतु राजा को यह बात अच्छी ना लगती । इसलिए जब भी वह मंत्री के मुख से यह बात सुनता तो जल भुन जाता । अब जब मंत्री और राजा अपनी जान बचाकर जंगल में पहुंचे तो मंत्री मन ही मन परमात्मा को धन्यवाद दे रहा था। उसने राजा से कहा- राजन! घबराने की क्या जरूरत है ,ईश्वर पर भरोसा रखो वह जो भी करता है अच्छा ही करता है ।हमारी पराजय का कोई भेद होगा। जो हमें अभी तक पता नहीं चल रहा है। राजा इस आशापूर्ण उत्तर से जल भुन गया । उसने मंत्री से कहा- तुम्हारा परमात्मा कितना निर्दयी है उसने मेरा राजपाट ताज- तख्त सभी कुछ मुझसे छीन लिया।बातें करते काफी समय बीत गया। अंधेरा छाने लगा और फिर वर्षा भी होने लगी। मौसम में एकदम ठंड छा गई। उन्हें सर्दी पीड़ा दे रही थी। उन्होंने आग जलाई परंतु बौछार के साथ ही वह भी बुझ गई । तभी राजा फिर भड़क कर मंत्री से कहा- तुम्हारा भगवान कितना निर्दयी है, देखो कितनी बारिश हो रही। उसे हम पर जरा भी तरस नहीं आता। इतने में उन्हें घोड़ों के टापू का स्वर सुनाई दिया। सिपाही घोड़ों पर बैठकर उनकी तरफ आ रहे थे। दुश्मनों के सिपाहियों को देखकर राजा का बुरा हाल हो रहा था । लेकिन अंधेरा होने के कारण राजा और मंत्री के घोड़े दिखाई ही नहीं दिए । तभी उनमें से एक ने कहा – जल्दी ढूंढो वह यहीं कहीं छुपे होंगे। दूसरे ने कहा – जल्दी करो कल उन दोनों को फांसी दे दी जाएगी और हमें बहुत सारा इनाम मिलेगा। लेकिन वे सैनिक राजा और मंत्री को ना ढूंढ सके और अपना सा मुंह लेकर वापस चले गए।

इस तरह राजा और मंत्री की जान बच गई। तभी मंत्री ने राजा से कहा महाराज अब तो आपको ईश्वर पर भरोसा हो गया होगा कि परमात्मा जो भी करता है अच्छा ही करता है। यदि भगवान की कृपा से वर्षा न होती तो सिपाही आग की रोशनी में हमें ढूंढ लेते और कल हमें फांसी हो जाती। अब राजा अपने समझदार भक्त मंत्री की बातें सुनकर बहुत प्रभावित हुआ । अब उसे परमात्मा पर विश्वास हो गया उधर उसके राज्य में अचानक प्राकृतिक आपदाएं आई। राजमहल में बैठा दुश्मन राजा महल के मलबे में दबकर ही मर गया। चारों ओर हाहाकार मच गई। उधर मंत्री और राजा दोबारा अपने राज्य में चले गए बिना लड़े भिड़े ही उन्हें राज्य पुनः प्राप्त भी हो गया।

एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ कुछ लिख रहा था- पिछले साल किडनी स्टोन के कारण मेरा आॅपरेशन हुआ। इस आॅपरेशन के कारण बहुत लंबे समय तक मुझे बिस्तर पर रहना पड़ा। इसी साल मैं 60 वर्ष का हुआ और अपनी पसंदीदा नौकरी से रिटायर हो गया। अब मैं बेरोजगार हूं। इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुख भी झेलना पड़ा। और इसी साल कार एक्सिडेंट हो जाने के कारण मेरा बेटा मेडिकल की परीक्षा में फेल हो गया क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट-फूट का नुकसान अलग हुआ।

अंतमें लेखक ने लिखा- ‘यह बहुत ही बुरा साल था।’ जब लेखक की पत्नि लेखन कक्ष में आई तो उसने देखा कि, उसका पति बहुत दुखी लग रहा है और अपने ही विचारों में खोया हुआ है। अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा और पढ़ा कि वह क्या लिख रहा था। वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई और थोड़ी देर बाद एक दूसरे कागज के साथ वापस लौटी और वह कागज उसने अपने पति के लिखे हुए कागज के बगल में रख दिया। लेखक ने पत्नि के द्वारा रखे कागज को देखा और उसे पढ़ना शुरू किया :

पिछले साल आखिर मुझे उस किडनी स्टोन से छुटकारा मिल गया जिसके कारण मैं कई सालों से दर्द से परेशान था। इसी साल मैं 60 वर्ष का होकर स्वस्थ-दुरुस्त अपनी नौकरी से स्वाभिमान के साथ सेवानिवृत्त हुआ। अब मैं पूरा ध्यान लगाकर शां‍ति के साथ अपने समय का उपयोग उन कामों के लिए करूंगा, जिन्हें नौकरी के दौरान मैं नहीं कर पाया था। इसी साल 95 वर्ष के मेरे पिता बगैर किसी पर आश्रित हुए और बिना गंभीर बीमारी के परमात्मा के पास चले गए। इसी साल भगवान ने एक्सिडेंट में मेरे बेटे की रक्षा की। कार टूट-फूट गई लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई। उसे नई जिंदगी तो मिली ही और हाथ-पांव भी सही सलामत हैं।

अंत में उसकी पत्नि ने लिखा था, ‘इस साल भगवान की हम पर बहुत कृपा रही, साल अच्छा बीता।’

मानव-जीवन में प्रत्येक मनुष्य के समक्ष अनेकों परिस्थितियां आती हैं, उन परिस्थितियों का प्रभाव कैसा और कितना पड़ेगा, यह पूरी तरह हमारे सोचने के तरीके पर निर्भर करता है। चीजें वही रहती हैं पर नजरिया बदलने से पूरा परिणाम बदल जाता है। जीवन में सकारात्मक विचार उस इंसान के पास आता है जो ईश्वर की योजना पर विश्वास करता है। और यही तो है आध्यात्मिकता। यह आध्यात्मिकता उसे बताती है कि जीवन-मरण ईश्वर के हाथों में है। और ईश्वर जो करता है, अच्छा ही करता है। अतः ईश्वर पर अटल विश्वास रखने की जरूरत है। किसी ने सही कहा है- जो व्यक्ति हर पल दुख का रोना रोता है, उसे द्वार पर खड़ा सुख बाहर से ही लौट जाता है। कुछ दिनों के लिए जिंदगी मिली है। क्यों हम इसे खुल कर जिएं। दुखों के बावजूद चेहरे पर मुस्कान लाएं। बच्चों के साथ मस्ती करें। किसी चुटकुले पर जोर से ठहाका लगाकर हंसे। गिले-शिकवे भूला दें। रोज दिन प्रभु को सुख-दुख दोनों के लिए धन्यवाद दें। वक्त सभी को मिलता है, जिंदगी बदलने के लिए पर दोबारा जिंदगी नहीं मिलती है वक्त बदलने के लिए। बस एक बार केवल, तो मिली है ये जिंदगी फिर क्यों न हम इसे खुल कर जीएं। क्योंकि जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना। एक खुशहाल जीवन के लिए इससे बेहतर आध्यात्मिकता क्या हो सकती है।


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