Meri Matrabhasha Hindi

” मेरी मातृभाषा हिंदी ” लेख में हम हमारे लेखक साथियों की रचनाओं को प्रस्तुत कर रहे है । ये रचनाएं लेखक द्वारा विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर लिखी गई है । सभी साथियों का हम आभार प्रकट करते है ।


” भाषा- पहचान होती है, स्वाभिमान और संस्कृति होती है। “

कविता-

कैसे कह दें अंग्रेजों की गुलामी से
आजाद हैं हम
शारीरिक न सहीं पर मानसिक रूप में
उनके कैद हैं हम

छोड़ कर अपनी संस्कृति
उनकी संस्कृति में ढल चुके हैं हम
भूलकर नमस्ते! आप कैसे हैं?
कहते हैलो ! हाऊ आर यू?
धीरे धीरे उन जैसा बन रहे हैं हम

थी क्या कभी रूप हमारी
खादी की धोती और सारी
आज बदला रुप और ‌भारतीय
अस्मिता का स्वरूप
पहनती मम्मी जींस और छोड़
रही अब दादी‌ सारी, दादी सारी ।

माना कि अंग्रेजी मजबूरी है
पर इसके कारण हिन्दी से
क्यूं दूरी है ?
अपने घर पर हम हो रहे अपमानित
और दूसरी भाषाएं अन्य देशों
में भी सम्मानित !

क्यों आज भारत बना इंडिया है?
क्यों सोच हमारी अंग्रेजीयत है ?
क्यों अस्तित्व अपना हम स्वयं मिटा रहे
न होते हुए अंग्रेजों के,
गुलामी उनकी कर रहे ?

अब तो आंखें अपनी खोलो यारों
हिंदी भाषा ही नहीं मां है हमारी
स्वाभिमान से बोलो‌ यारों
स्वाभिमान से बोलो‌ यारों ।

जय हिन्द, जय हिन्दी

©Witer – Yamini Suryaja

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कितनी अजीब बात है ,

कहते हैं जो, हिंदी बहुत अच्छी है बताओ फिर
संस्कृत क्यों रहने दी किताबों में ll

कहते हैं जो हिंदी सुंदर है,
तो बताओ क्यों नहीं गाते प्यार वाले गाने ll

कहते हैं जो हिंदी हमारी है,
तो बताओ प्रेम से प्रेम को हिंदी में व्याप्त क्यों नहीं करते ll

कहते हैं जो हिंदी सबसे अलग है तो बताओ

पौधों को क्यों नहीं गाना कभी सुनाया???

©Writer – Tejal Chokasi


भाषा सारी पढ़नी है पर
हिंदी से कतराते है ,

माता पिता भी बचों को अब
इंग्लिश ही पढ़ाते है ,

नन्हे बच्चों प्यारे बच्चों
इतना सा तुम काम करो,

पढ़ो लिखो तुम हर भाषा
पर हिंदी का सम्मान करो,

नमन पिता को मां को पूजो
दुनिया भर में नाम करो,

मात्र भाषा है अपनी इसको
ऐसी वैसी तुम मत समझो ,

सबसे पौराणिक भाषा अपनी
सनातन सबसे पहले है

हिंदी अपनी मां है सब मिल
आओ उसे प्रणाम करो

©Writer – Arpit Tripathi


मेरी माँ तो हिंदी है ।

हिंदी मेरा तन मन सारा,
हिंदी मेरा नारा है ।
हिंदी में पलता बढ़ता मै,
हिंदी ही जग सारा है ।

ममता की आँचल है हिंदी,
मुझको रोज सँवारे है ।
मासी के गोदों में खेला,
माँ के राज दुलारे है ।

तोतली बातें सुनकर आये,
श्रृंगारों में बिंदी है ।
मेरी कण कण में जो बसती
मेरी माँ तो हिंदी है ।

©Writer – Kumar Ashok


मातृभाषा

हमारे भाव की है जो भाषा,
वही है हिंदी हमारी मातृभाषा।
हिंदी का मान बड़े जग में,
हम माता सम मान हैं देते।
यह भारत के वासियों के लिए ,
मातृ स्वरूप में बन जाए वंदनीया ।
जन जन की स्वतंत्रता से पहले यही थी,
एवं आज भी यही है हमारी अभिलाषा ।
नित नव उच्चाइयों को पाकर,
बन जाए हिंदी की संसार भर में उच्चतम परिभाषा।

मातृभाषा दिवस की अनन्त शुभकामनाएं

© Writer – Priyanshi Bhatt


हमारी हिंदी मातृभाषा…

भाषायें है अनेक पर हिंदी जैसी कोई नहीं,
अनेकता में एकता यही है हमारी मातृभाषा की विशेषता,
माँ सरस्वती भी हिन्दी में बस्ती है और

हम भारतियों का अभिमान भी हिंदी है,
आओ हिन्दी को एक पर्व की तरह मानते है,
पूरी दुनिया में अपना डंका बजवाते है..

जय हिन्द जय भारत…….

© Writer – Sariq


“मातृभाषा” हिन्दी
रजत स्वर्ण सा ये अलंकार देती है,
व्यक्ति की वाणी को आकार देती है।
ज्ञान तो हर भाषा में उपलब्ध हो जाता है,
पर हिंदी हमारी,हमको संस्कार देती है।।

© Writer – Dipendra Soni


“मातृभाषा” हिंदी

संस्कृति से जुड़े हैं हम,
कविता/कहानी को अपने भाषाओं से बुने हैं हम।
ठीक वैसे ही, अपनी भाषा हिंदी है।
संस्कृति है, भावना है, मन की प्रार्थना के संग-
माँ भारती की बिंदी है।
अपनी मातृभाषा हिंदी है।

© Writer – Abhinav Chaturvedi


क्या लिखूं मैं भाषा पर, यहां सब भाषा से अनजान है।
सबको चाहिए इंग्लिश अच्छी ,और कहते देश महान है।।
लंगड़ी लूली इंग्लिश बोल के, खुद को जेंटलमैन बताते हो।
अच्छी खासी जो हिंदी बोले, उसको अनपढ़ कह के चीढ़ाते हो।।

ऐसा क्या है इंग्लिश में, तुम हमको भी बताओगे।
खुद की भाषा खुद की नहीं, और तुम हमको गवार बुलाओगे।।
देव भाषा है हमारी संस्कृत, जिससे तुमने अपनी भाषा बनाई है।
हम जात पात पर रह गए लड़ते,तुमने दिखाई बहुत चतुराई है।।

जिस वेद को हम ना पढ़ पाए, उसको तुमने चुराई है।
ले जा के उसको अपने देश, अच्छे से रिसर्च कराई है।।
सारी मेहनत हमारी थी, बस उस पर मोहर तुमने लगाई है।
अच्छे खासे वतन पर मेरे, इस समय इंग्लिश ने की चढ़ाई है।।

सुधर जाओ ए वतन वालो, इंग्लिश अपनी पहचान नहीं।
हमने सीखा था स्वागत करना, और वेलकम अपनी पहचान नहीं।।
अपनी भाषा अपनी है, इसमें सब अपना सा लगता है।
मत भूलो तुम अपनी भाषा को,इंग्लिश में तुम्हारा अधूरा ज्ञान झलकता है।।

© Writer – Ashu Mishra


हिंदी

यूं तो किसी भाषा का हम तिरस्कार नहीं करते,
बस हिंदी से हम बेपनाह प्यार हैं करते।
जिससे मिलती मेरे रूह को सुकून,
जो हर भारतीयों के दिल की है आरज़ू।
भले ही हम कर लें बातें हज़ार,
बोल लें इंग्लिश के शब्द चार,
लेकिन जो है हिंदी में मिठास,
वो कहां है किसी और में बात।
हमारी मातृभाषा है हिंदी,
जो करती है हमारे दिल पर राज।

© Writer – Khushbu Singh


Categories: Hindi Shayari

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